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16 करोड़ के घोटाले के आरोपी अधिकारियों की गिरफतारी पर, हाईकोर्ट ने लगायी रोक

नैनीताल,  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 16 करोड़ रूपये के घोटाले के आरोपी तराई बीज निगम के अधिकारियों की गिरफ्तारी पर आज रोक लगा दी। निगम के बीडी त्रिपाठी, शिव मंगल त्रिपाठी, जीसी तिवारी,पीएस बिष्ट, पीके चौहान, अजित सिंह और आरके निगम ने न्यायालय में याचिका दायर कर गिरफतारी पर रोक लगाने की मांग की थी।

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 न्यायमूर्ति बीके बिष्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश तक इनकी गिरफतारी पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। न्यायालय ने यह रोक पंतनगर स्थित तराई बीज निगम के छह अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई के बाद लगायी है। निगम के पीएस बिष्ट, पीके चौहान, अजित सिंह, बीडी त्रिपाठी, शिव मंगल त्रिपाठी, जीसी तिवारी और आरके निगम ने न्यायालय में याचिका दायर कर गिरफतारी पर रोक लगाने की मांग की थी।

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 याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि निगम के प्रशासनिक अधिकारी सीके सिंह ने सात जुलाई को उनके खिलाफ पंतनगर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज करायी है। जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2015.16 में निगम को गेहूं की बिक्री से 16 करोड़ का घाटा हुआ है। इस मामले की जांच के लिए पिछले साल 29 जुलाई 2016 को अपर मुख्य सचिव ने चार सदस्यों की कमेटी गठित की।

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कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में निगम को 16 करोड़ के घाटे की पुष्टि की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निगम को यह घाटा दस प्रशासनिक अधिकारियों के कारण हुआ है। जिनका नाम लेखाधिकारी अतुल पांडेए लेखाकार जीसी तिवारीए प्रशासनिक अधिकारी शिव मंगल त्रिपाठीए उपमुख्य वित्त अधिकारी बीडी तिवारीए उपमुख्य विपणन अधिकारी अजीत सिंहए उप मुख्य विपणन अधिकारी एके लोहनीए मुख्य बीज उत्पादक अधिकारी दीपक पांडेए मुख्य अभियंता पीके चैहानध् तत्कालीन विपणन अधिकारी रिटायरए कंपनी सचिव आरके निगम व पूर्व निदेशक पीएस बिष्ट को दोषी पाया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे निर्दोष हैं।

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