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20 से 30 अप्रैल के मध्य होंगी, समाजवादी पेंशन योजना की जांच

मऊ,  योगी सरकार द्वारा पूर्ववर्ती सपा सरकार की समाजवादी पेंशन योजना पर रोक लगाने के बाद अब इसकी जांच भी बैठा दी गई है। यह जांच इस बात को लेकर होगी कि जिन्हें पेंशन मिल रही थी, वो इसके असली हकदार थे या नहीं। योगी सरकार ने बताया कि उन्हे सन्देह है कि समाजवादी पेंशन में सपा के कार्यकर्ताओं व उनके परिचितों को इसका फायदा दिया जा रहा है। जिसकी जांच होना आवश्यक है। इसकी जांच का जिम्मा सरकार ने आंगनबाड़ी वर्कर, ग्राम पंचायत कर्मी और लेखपालों को सौंपा है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले में जांच कार्य 20 से 30 अप्रैल के मध्य होंगे। इसके लिए जिले के सभी 684 ग्राम पंचायतों व शहरी सात निकायों के 114 वार्डों में एक साथ जांच के कार्य शुरू होंगे। जिले के सभी 92 न्याय पंचायतों में इसके लिए विभिन्न विभागों के 92 अधिकारी इसकी मॉनीटरिंग करेंगे। प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव के अनुसार चूंकि यह कार्य मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार है। इसलिए इस कार्य में ढिलाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पूर्व अखिलेश सरकार में भी समाजवादी पेंशन योजना का सत्यापन कराया गया था। इसमें ऐसे-ऐसे लोग पेंशन का हकदार बन गए थे। जिनके पास ऐशो-आराम की सभी वस्तुएं थी। लग्जरी गाडियां एवं आलीशान मकान है, उनको भी समाजवादी पेंशन की कई किश्तें थमा दी गईं। यही नहीं एससी व अल्पसं यक कोटे में कटौती कर धनाढ्यों को लाभान्वित कर दिया गया। कल-कारखाना चलाने वाले भी इसके लाभार्थी बन गए थे। डेटा बेस सर्वे से मालूम हुआ था कि इसमें भी गड़बड़झाला किया गया है। इसमें तीन हजार से ज्यादा ऐसे लोगों का नाम समाजवादी पेंशन के लिए चला गया था जो दो एकड़ से ज्यादा जमीनों के मालिक थे।