भाजपा सरकार की बदनीयती की हुयी है हार,सत्ता में रहने का कोई हक नहीं: अखिलेश यादव

लखनऊ, समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि लोकसभा में परिसीमन बिल पास नहीं होने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की बदनीयती की हार हुई हैं। श्री यादव ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा की हार का सीधा मतलब है कि सरकार जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व विपक्ष कर रहा है। इस सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है।

उन्होने कहा कि सपा महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन जल्दबाजी में जिस तरह से लाया गया, उसके खिलाफ है। जातीय जनगणना होगी तो देश आरक्षण मांगेगा, भाजपा उससे बचना चाहती है। जब गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा। देश में आरक्षण के साथ महिलाओं को संरक्षण की भी जरूरत है।

अखिलेश यादव ने कहा, “ हम महिला बिल के खिलाफ नहीं थे। सन् 2023 के बिल का हमने समर्थन किया था। अब वह बिल ऐक्ट भी बन गया है। यह संशोधन सिर्फ परिसीमन का था। अभी 543 सांसदों की संख्या पर भी सरकार आरक्षण घोषित कर सकती थी। हम आधी आबादी को हक और सम्मान देने के पक्ष में है लेकिन उसमें पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं को भी आरक्षण दिया जाये।”

सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार जातीय जनगणना को टाल रही है। बिना जातीय जनगणना के महिला आरक्षण का कोई फायदा आधी आबादी को मिलने वाला नहीं है। भाजपा आधी आबादी में अविश्वास पैदा करने की साजिश करके दरार पैदा करना चाहती है। समाज को छोटे-छोटे गुटों में बांटकर एक दूसरे को लड़ाने का षडयंत्र कर रही हैं ताकि मनमाने तरीके से निर्णय ले सके। भाजपाई सत्ता के लिए इतना नीचे गिर सकते हैं किसी ने सोचा नहीं था।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का सीएमएफ (क्रिएट, मिस्ट्रेस् एण्ड फियर) फार्मूला अब पिट चुका हैं। भाजपाइयों का समाज के बीच भय और अविश्वास पैदा करने का सामाजिक षड्यंत्र अब और नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की एकता में दरार डालकर भाजपा यह बिल लायी है। विपक्ष और महिलाओं की एकजुटता से भाजपा के मंसूबों पर पानी फिर गया है

उन्होने कहा कि जिस तरह भाजपा इस बिल में और चीजों को छुपाकर ला रही थी उसका विरोध था, सेंसस चल रहा है। सेंसस पूरा हो जाए उसके बाद इस बिल को लाते तो शायद इस बिल के पक्ष में सभी होते। उन्होंने कहा कि हम महिला आरक्षण के विरोध में नहीं है। पुख्ता तैयारी हो, जल्दबाजी न हो। आधी आबादी में पिछड़ी, अल्पसंख्यक महिलाओं को भी हक और सम्मान मिले। किसी का भी हक मारा न जाय।

अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाएं स्वास्थ्य, शिक्षा में लूट की वजह से परेशान है। उन्हें अपमानित होना पड़ रहा हैं। पुरानी सोच की महिला भले उनके प्रति उदार हो, नई सोच की महिलाएं भाजपा की चाल में नहीं आएंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति अभी भी भाजपा की पुरानी सामंती सोच है। उनकी निर्णय लेने की स्वतंत्रता, घूमने फिरने की आजादी, पहनावे को लेकर भी उनकी पुरानी सोच प्रतिबंधित करती है। इस दकियानूसी सोच के प्रदर्शन, हिंसा भी हो जाती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने तो ठगना चाहा था। विपक्ष में उन्हें धूल चटा दी। भाजपा ने महिलाओं को बांटने की साजिश की थी।

उन्होने कहा कि वे महिलाओं के साथ छलावा नहीं होने देंगे। भाजपा की नीयत चुनाव फायदा उठाने की थी। तब प्रधानपति की तरह सांसद प्रति जैसी प्रथा चल निकलती। उन्होंने कहा कि छात्र संघ राजनीति की नर्सरी थी जिसे खत्म कर दिया गया है। जरूरत इस बात की हैं कि महिलाओं में योग्यता के साथ उन्हें निर्णय लेने की क्षमता विकसित की जाए। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की बदनामी का डर होता है। राजनीति में तमाम बाधाएं डाली जाती है। मानसिक, सामाजिक बाधाएं आती हैं इसलिए महिलाओं के संबंध में पुख्ता तैयारी होनी चाहिए। असुरक्षा के भाव से उन्हें बचाना होगा इसके लिए ऑल विमेन कोर्ट भी बन सकते है।

अखिलेश यादव ने अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर भगवान परशुराम जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की 2027 में सरकार बनने पर परशुराम जयंती पर फिर अवकाश घोषित करेगी।

उन्होने पत्रकारों के समक्ष फतेहपुर के चाय दूकानदार आर्यन यादव और उसके पिता शेषमन यादव तथा लोधी कथा वाचक श्री अवधेश चन्द्र को पेश किया। फतेहपुर में श्री यादव ने जहां चाय पी थी उस चाय की दुकान पर अधिकारी यह आरोप लगाकर दुकान सील कर दिए कि एल्युमिनियम के बर्तन में चाय क्यों बनाते हो। चाय दूकानदार आर्यन के बताया कि उसको मारा-पीटा गया तथा जान से मारने की धमकी दी गयी है।

अखिलेश यादव ने आर्यन को तांबे के बर्तनों का सेट भेंट किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि चाय वाले नौजवान को न्याय मिलेगा और जिन्होंने घटना की उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। सपा अध्यक्ष ने लोधी समाज के कथा वाचक अवधेश चन्द्र लोधी का भी सम्मानित किया।

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