अखिलेश यादव और IPAC ने मिलाया हाथ, समाजवादी पार्टी को मिला चुनावी तकनीक का साथ

“क्या 2027 में यूपी की राजनीति पूरी तरह बदलने वाली है? क्या अखिलेश यादव ने खेल पलटने की तैयारी कर ली है? क्योंकि…अब एंट्री हो चुकी है चुनावी रणनीति की मास्टरमाइंड कंपनी— I-PAC (Indian Political Action Committee) की!”

यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर (PK) की कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) से हाथ मिला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी I-PAC ने हाल ही में समाजवादी पार्टी के साथ उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव के लिए काम करने का अनुबंध किया है। अब यूपी में I-PAC समाजवादी पार्टी के चुनावी अभियान मे तकनीकी मदद करेगी।

“जी हां! चुनावी रणनीतिकार रहे और अब जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर की कंपनी— I-PAC, जिसने कई राज्यों में सरकारें बनवाईं…

इसके पिछले रिकॉर्ड:
2014 लोकसभा: BJP के लिए मोदी कैम्पेन (बड़ी जीत)।
2015 बिहार: नीतीश कुमार (JD(U)) के लिए।
2019 आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के लिए
2021 तमिलनाडु: DMK की जीत।
2021 बंगाल: TMC की बड़ी जीत।
अब वही कंपनी I-PAC, समाजवादी पार्टी के लिए काम करेगी!”

क्यों पड़ी जरूरत-
UP बहुत बड़ा राज्य (403 सीटें),
अलग-अलग क्षेत्र, अलग अलग समस्यायें
जाति –धर्म -क्षेत्रीय फैक्टर मजबूत हैं।
BJP के पास संगठन, मनी पावर, मोदी-योगी की ब्रांडिंग और सरकारी मशीनरी है।

इसलिये सपा को जरूरत है-
फोकस्ड कैंपेन
डिजिटल और सोशल कैंपेनिंग में आगे
कांग्रेस-SP गठबंधन की स्थिति अभी अनिश्चित है (INDIA ब्लॉक में तनाव)।
I-PAC भारत की सबसे सफल चुनावी कंसल्टेंसी फर्मों में से एक है।
कैसे हुई — I-PAC की सपा में इंट्री

एमके स्टालिन (DMK) और ममता बनर्जी (TMC) ने अखिलेश को I-PAC हायर करने की सलाह दी थी।
दिल्ली और पश्चिम बंगाल में अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर (या उनकी टीम) के बीच सीक्रेट मीटिंग्स हुईं (दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में)।

लेकिन ये भी जान लें-
प्रशांत किशोर ने 2013-2014 के दौरान सिटीजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) के रूप में संस्था की नींव रखी थी, जो बाद में IPAC बनी। 2021 के बाद से, उन्होंने खुद को कंपनी से अलग कर लिया है, और अब वे ‘जन सुराज’ पार्टी के माध्यम से राजनीति में सक्रिय हैं। IPAC अब एक स्वतंत्र संस्था के रूप में, अपनी कोर टीम के माध्यम से काम कर रही है। जिसके अब प्रमुख प्रतीक जैन हैं। जो I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक के रूप में कार्य कर रहे हैं। 2021 के बाद I-PAC को सबसे बड़ी और निरंतर सफलता पश्चिम बंगाल (TMC) में मिली है, जबकि आंध्र प्रदेश में उसे विफलता का सामना करना पड़ा।
तो क्या बदलेगा? संभावित पॉजिटिव असर SP पर:

👉 पहला बड़ा असर – प्रोफेशनल टच
• चुनावी रणनीति हाईटेक होगी
• डेटा, सर्वे, बूथ मैनेजमेंट… सब कुछ प्रोफेशनल तरीके से होगा।
• कैम्पेन अब ज्यादा ऑर्गनाइज्ड, डेटा-ड्रिवन और टारगेटेड होगा।
• बूथ लेवल तक माइक्रो-मैनेजमेंट से पार्टी का वोट शेयर बढ़ सकता है।

👉 दूसरा असर – डिजिटल और ग्राउंड गेम
• सोशल मीडिया,
• डिजिटल कैंपेन और
• AI-बेस्ड टारगेटिंग और सर्वे
• युवाओं पर फोकस
• नए/शहरी वोटर्स को टारगेट किया जाएगा।

👉 तीसरा असर – इमेज मेकओवर
• अब सपा सिर्फ “पुरानी पार्टी” नहीं,
• बल्कि “नई सोच वाली पार्टी” के रूप में दिख सकती है।
• PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को और बेहतर
तरीके से एकजुट किया जा सकता है

👉 चौथा असर – BJP के लिए चुनौती बढ़ेगी
योगी सरकार मजबूत (2022 में 255+ सीटें),
लेकिन 2024 के परिणाम निराशाजनक
I-PAC की एंट्री से Opposition का ग्राउंड गेम बेहतर होगा,
खासकर PDA वोट बैंक में सेंध लग सकती है।

लेकिन क्या जीत पक्की है?
“यह सवाल उठना स्वाभाविक है…”
👉 यूपी में पहले से ही मजबूत है- भारतीय जनता पार्टी
👉 जातीय समीकरण, स्थानीय नेता और ग्राउंड रियलिटी किसी भी
रणनीति से ज्यादा भारी पड़ सकते हैं
चुनाव 2027 में हैं और अभी बहुत कुछ बदल सकता है
(जैसे गठबंधन, लीडरशिप, इकोनॉमी, लॉ एंड ऑर्डर इश्यूज आदि)।
👉 और सबसे बड़ा सवाल— क्या सिर्फ स्ट्रैटेजी से चुनाव जीते जा सकते हैं?
I-PAC की सफलता हमेशा क्लाइंट पार्टी की ग्राउंड रियलिटी पर निर्भर करती है।

I-PAC ने कई बार Opposition को पावरफुल बनाया है,
I-PAC SP को ज्यादा प्रोफेशनल और आक्रामक बनाएगी,
I-PAC की एंट्री अखिलेश यादव के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है
I-PAC की एंट्री से मुकाबला टाइट हो जाएगा।
I-PAC अभी एक बड़ा बूस्ट है SP के लिए! लेकिन जीत की गारंटी नहीं।
“अगर I-PAC और समाजवादी पार्टी की ये जोड़ी सही बैठ गई…
तो 2027 का यूपी चुनाव
सीधा ‘वन साइडेड’ नहीं बल्कि
एक ‘कांटे की टक्कर’ बन सकता है!”
“ लेकिन आप क्या सोचते हैं?
क्या I-PAC बदल देंगी यूपी की राजनीति?
या फिर बीजेपी ही रहेगी नंबर 1?

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