लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उप सभापति चुने गये हरिवंश

नयी दिल्ली, राज्यसभा के मनोनीत सदस्य श्री हरिवंश को शुक्रवार को लगातार तीसरी बार उच्च सदन के उप सभापति के पद पर ध्वनिमत से चुन लिया गया।

नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने श्री हरिवंश को उप सभापति चुने जाने का प्रस्ताव रखा जिसका भारतीय जनता पार्टी की सदस्य एस. फांगनोन कोन्याक ने समर्थन किया। सदन ने इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। वह इस पद पर लगातार तीसरी बार चुने गये हैं। प्रस्ताव रखे जाने के दौरान विपक्ष के सदस्योंं ने इस संबंध में कुछ कहना चाहा लेकिन सभापति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। विपक्ष की ओर से इस पद के लिए किसी का नामांकन नहीं किया गया था।

यह पहला अवसर है जब किसी मनोनीत सदस्य को सदन का उप सभापति चुना गया है।

सभापति सी पी राधाकृष्णन ने जरूरी विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद उप सभापति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करते हुए श्री नड्डा से अपना प्रस्ताव पेश करने को कहा। कुल पांच सदस्यों ने श्री हरिवंश के चुनाव के लिए प्रस्ताव पेश किये। श्री नड्डा के अलावा भाजपा अध्यक्ष और सदन के सदस्य नितिन नवीन ने भी प्रस्ताव पेश किया जिसका समर्थन भाजपा के बृज लाल ने किया। तीसरा प्रस्ताव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया और इसका समर्थन भाजपा के सुरेंद्र सिंह नागर ने किया। इसके अलावा संजय कुमार झा के प्रस्ताव का समर्थनक उपेंद्र कुशवाहा ने और जयंत चौधरी के प्रस्ताव का समर्थन मिलिंद मुरली देवड़ा ने किया।

श्री नड्डा के प्रस्ताव को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। सभापति ने उन्हें सदन का उप सभापति चुने जाने की घोषणा की। इसके बाद श्री नड्डा और नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे श्री हरिवंश को उनकी सीट तक ले गये।

उप सभापति के चुनाव की स्थापित परंपरा के अनुसार सदन में सभी प्रस्ताव एक-एक कर प्रस्तुत किए जाते हैं और यदि कोई एक प्रस्ताव सदन द्वारा पारित हो जाता है, तो शेष प्रस्ताव निरर्थक हो जाते हैं और उन पर मतदान नहीं कराया जाता । आज भी श्री नड्डा के प्रस्ताव के पारित होने के बाद बाकी चारों प्रस्ताव निर्थरक हो गये।

श्री हरिवंश का सदस्य के रूप में दूसरा कार्यकाल गत नौ अप्रैल को समाप्त हुआ था और इसके एक दिन बाद ही उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति ने उच्च सदन में मनोनीत किया था।

श्री हरिवंश का राज्यसभा में पहला कार्यकाल 10 अप्रैल 2014 में शुरू हुआ था और वह आठ अगस्त 2018 में पहली बार उप सभापति चुने गये। 2020 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुने जाने पर 14 सितम्बर 2020 को दोबारा उप सभापति चुना गया।

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