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इंजीनियर्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू किये जाने की उठी मांग

लखनऊ ,  उत्तर प्रदेश के बिजली इंजीनियरों ने विभागीय कार्यवाही के नाम पर उत्पीड़न का आरोप लगाने के साथ आये दिन होने वाली मारपीट की घटनाओ का हवाला देते हुये इंजीनियर्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू किये जाने की मांग की है। विद्युत अभियन्ता संघ की गुरूवार को सम्पन्न केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ऊर्जा निगमों की बेहतरी एवं विद्युत अभियन्ताओं की ज्वलन्त समस्याओं पर चर्चा की गयी।

संघ के महासचिव राजीव सिंह ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में ऊर्जा निगमों में नये.नये प्रयोगों से विभाग का घाटा 77 करोड़ रूपये से बढ़कर 85 हजार करोड़ रूपये से अधिक हो गया है। विद्युत परिषद के विघटन से बने नौ ऊर्जा निगमों का प्रशासनिक खर्च भी कई गुना बढ़ गया है लेकिन विघटन के अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं बल्कि ऊर्जा निगम लगभग तबाही की कगार पर हैं।

उन्होने कहा कि विद्युत क्षेत्र को बचाये रखने एवं प्रदेश की जनता को सस्ती बिजली दिये जाने के लिए आवश्यक है कि निजी क्षेत्र पर अति निर्भता समाप्त की जाये तथा सभी ऊर्जा निगमों पर एकीकरण कर उप्र राज्य विद्युत परिषद का गठन किया जाये। श्री सिंह ने कहा कि ऊर्जा निगम द्वारा अभियन्ताओं के किये जा रहे उत्पीड़न तथा अभियन्ताओं के साथ आये दिन हो रही मार.पीट एवं जानलेवा हमलों से बिजली अभियन्ताओं में भय व्याप्त है। इसलिये सरकार को अभियन्ताओं को सुरक्षा की गारण्टी देते हुए इंजीनियर्स प्रोटेक्शन एक्ट तत्काल लागू किया जाना चाहिए।

उन्होने कहा कि ऊर्जा निगमों में तमाम तरह के कन्सलटेन्ट रखे गये हैं जिनपर करोड़ों रूपये खर्च हो रहे हैं तथा विभाग को इनका कोई लाभ नहीं मिल रहा है बल्कि विभाग पर बोझ हैं। इसलिये सभी कन्सलटेन्टों का अनुबन्ध समाप्त किया जाये तथा इन कन्सलटेन्टों से विभाग को हुई लाभ.हानि पर श्वेत पत्र जारी किया जाये। उन्होने ऊर्जा निगमों में स्थानान्तरण नीति के नाम पर अभियन्ताओं के भारी संख्या में किये गये तबादलों को तत्काल निरस्त करने तथा स्थानान्तरण नीति में तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संशोधन करने की मांग की है।

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