क्रिटिकल मिनरल्स में बड़ा कदम: वर्ष के अंत तक शुरू होगा स्थायी चुंबकों का उत्पादन

नई दिल्ली, भारत अब सिर्फ खनिजों का आयात करने वाला देश नहीं रहना चाहता। देश ने तय कर लिया है कि वह क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करेगा। इसी लक्ष्य के साथ ₹32,000 करोड़ का बड़ा मिशन शुरू किया गया है।

G. Kishan Reddy ने कहा कि भारत अभी 95% तक क्रिटिकल मिनरल्स के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन अब सरकार तेजी से सुधार कर रही है। उन्होंने यह बात FICCI और खान मंत्रालय के संयुक्त कार्यक्रम में कही।

क्या है सरकार की योजना?

• ₹32,000 करोड़ का राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन शुरू

• 4,000 से अधिक अन्वेषण गतिविधियां जारी

• 9 उत्कृष्टता केंद्र (CoE) स्थापित किए जा रहे हैं। आयात पर सीमा शुल्क में छूट

• रिसर्च, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग पर खास फोकस

मंत्री ने कहा कि सरकार “रिफॉर्म एक्सप्रेस” मोड में काम कर रही है, ताकि अन्वेषण से लेकर उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन भारत में ही विकसित हो।

वर्ष के अंत तक शुरू होगा उत्पादन

₹7,280 करोड़ की PLI योजना के तहत इस साल के अंत तक स्थायी चुंबकों (Permanent Magnets) का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

वैश्विक सहयोग भी मजबूत

High Commission of Canada in India के प्रतिनिधियों ने भी भारत के साथ मजबूत साझेदारी की इच्छा जताई। उद्योग जगत की कंपनियां जैसे Hindustan Zinc Ltd और JSW Group ने इस मिशन को देश की खनिज सुरक्षा के लिए अहम बताया।

निष्कर्ष

₹32,000 करोड़ के इस मिशन के साथ भारत आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम बढ़ा रहा है। लक्ष्य साफ है — आयात कम करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान

 

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