“राष्ट्रीय जनजाति दिवस” मनाने के लिये, इस तारीख का हुआ प्रस्ताव

नयी दिल्ली, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने राष्ट्र के निर्माण में आदिवासियों के योगदान को पहचान दिलाने व सामाजिक रूप से समावेशी भारत के निर्माण के लिए हर साल 19 फरवरी को “राष्ट्रीय जनजाति दिवस” मनाने का प्रस्ताव दिया है।

एक अधिकारी ने बताया कि आयोग ने 11 सितंबर को एक बैठक में ‘राष्ट्रीय जनजाति दिवस’ मनाने के विषय पर चर्चा की और संबंधित मंत्रालय को जरूरी कदम उठाने के लिए अपनी सिफारिश भेजी।

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इस बैठक के विवरण में कहा गया है,‘‘इससे न केवल आदिवासियों के मुद्दे विचार विमर्श के केंद्र में आएंगे बल्कि नीति निर्माताओं और बुद्धिजीवियों का उनसे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ध्यान खींचेगा। ’’

उसमें कहा गया है कि राष्ट्र निर्माण में आदिवासियों के योगदान को स्वीकार करने, स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी नेताओं के बलिदान को मुख्य धारा में लाने और सामाजिक रूप से समावेशी भारत के निर्माण के लिए राष्ट्रीय जनजाति दिवस मनाने की जरूरत है।

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आयोग के संयुक्त सचिव एस के राठो ने पीटीआई भाषा को बताया कि एनसीएसटी की सिफारिश के आधार पर जनजातीय मंत्रालय गृह मंत्रालय को एक प्रस्ताव सौंपेगा जो उसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखेगा।

अधिकारी ने कहा कि इस मामले में जनजातीय मंत्रालय, राज्य सरकारें, राज्य जनजाति आयोग, एनजीओ, नागरिक समाज, आश्रम विद्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बैंक और शिक्षण संस्थान विभिन्न पक्ष हैं।

आयोग ने राष्ट्रीय जनजाति दिवस के मौके पर जनजाति कलाओं, हस्तशिल्पों, ज्वैलरी, कपड़े, दवाओं, पाक कला, जैसी विभिन्न गतिविधियों का प्रस्ताव रखा है।

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