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योगी सरकार से क्यों खफा है ये सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी

लखनऊ , सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से खासे नाराज हैं। उन्होने योगी सरकार पर आरोप लगाया है कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों की आवाज को दबाने के लिये सरकारी मशीनरी का बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है।

श्री मंदर ने गुरूवार को यहां पत्रकारों से कहा कि आजादी के बाद पहली बार संविधान की रक्षा के लिये हिन्दू और मुस्लिम समुदाय ने एकजुटता का परिचय देते हुये सीएए के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया। सीएए और एनआरसी के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुये लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने विरोध को दबाने के लिये एक वर्ग विशेष के खिलाफ खुली जंग छेड़ दी। शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर जुल्म ओ सितम ढहाये गये।

उन्होने कहा कि इस कार्रवाई को रोकने में मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग समेत सभी संवैधानिक संस्थाओं ने लचर रवैया अपनाया। न्यायालय भी सरकार की मनमानी रोकने में सफल नहीं हुआ। सरकार ने इस मामले में सांप्रदायिक भावना से काम किया। प्रदेश में कई स्थानो पर पुलिस दंगाई की भूमिका में नजर आयी। इस हिंसा में कई युवकों की जाने गयी।

पूर्व अधिकारी ने कहा कि राज्य के 10.15 जिलों में हिंसा भड़की जबकि अन्य जिले शांत रहे। वह खुद प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैए इस नाते उन्हे पता है कि इस मामले में जिला प्रशासनाें को हिंसा से बचने के उपाय तैयार करने चाहिये थे। पुलिस बलों को निहत्थों पर गोली चलाने का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होने कहा कि पुलिस की बर्बर हिंसा के मामले में पिछली 16 जनवरी को जनसुनवाई की गयी और पीडित परिवारों के अनुभवों को साझा किया गया जिससे पता चलता है कि सरकार ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर बदले की भावना से काम किया। पुलिस ने न सिर्फ आम लोगों के साथ हिंसा की बल्कि बेगुनाह मुसलमानो और कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने का काम किया। यूपी में करीब 19 युवकों की मौत पुलिस की गोली से हुयी।