अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता को लेकर केंद्र के खिलाफ विपक्ष लामबंद

अलीगढ़, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच सियासी घमासान  के आसार नजर आ रहे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने राज्यसभा में हंगामा किया। हालांकि सरकार ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है, जो बरकरार रहेगा।
सदस्यों का हंगामा शून्यकाल में तब शुरू हुआ जब सपा के जावेद अली खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा अपने परिसर से बाहर खोले जाने वाले पांच सेंटरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तीन सेंटर खुल चुके हैं और दो खोले जाने हैं लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति का एक बयान आया है कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने इन सेंटरों को गैरकानूनी करार देते हुए इन्हें दी जाने वाली वित्तीय सहायता बंद करने की धमकी दी है।

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के विजिटर स्वयं राष्ट्रपति हैं और उनकी मंजूरी के बिना विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और एग्जीक्यूटिव समिति कोई निर्णय नहीं कर सकती। फिर मानव संसाधन विकास मंत्रालय एएमयू के सेंटरों को दिया जाने वाला अनुदान रोकने की बात कैसे कह सकता है। खान ने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और एग्जीक्यूटिव समिति ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कानून की धारा 12 के तहत वर्ष 2008 में परिसर से बाहर पांच सेंटर स्थापित करने का निर्णय किया था।

खान ने कहा कि सच्चर समिति की रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के पिछड़ेपन और उनकी हालत के बारे में बताए जाने के बाद तत्कालीन संप्रग सरकार ने इस संबंध में एक नीति बनाई और विश्वविद्यालय ने संस्थान के परिसर के बाहर पांच सेंटर खोलने का निर्णय किया था।

उन्होंने कहा कि तीन सेंटर क्रमश: केरल के मलप्पुरम, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और बिहार के किशनगंज में खोले जा चुके हैं तथा शेष दो सेंटर खोले जाने हैं। उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार इस फैसले पर सवाल उठा रही है।

खान ने कहा कि सरकार एक ओर सबका साथ सबका विकास की बात कहती है और वहीं दूसरी ओर समाज के एक बड़े तबके को शिक्षा की सुविधा से वंचित करने का प्रयास करती है। उन्होंने सरकार से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और ऐसे अन्य संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे पर सरकार से स्पष्टीकरण देने की मांग की।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कर मामला अदालत में है और सभी को अदालत के फैसले के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

उनके जवाब से असंतोष जाहिर करते हुए जदयू के शरद यादव ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस सवाल का समाधान कानून के दायरे में, सर्वसम्मति से हो गया था उसे आप (सरकार) हलफनामा दे कर अदालत ले गए।
यूनिवर्सिटी के कार्यकारी परिषद में एक रिक्त पद को भरने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रपति को तीन नाम सुझाए थे। लेकिन राष्ट्रपति कार्यालय ने सुझाव वाली फाइल को लौटाते हुए और नाम बताने को कहा है।

मंत्रालय ने उस पद के लिए इंडिया टीवी के रजत शर्मा और विजय पी भटकर का नाम सुझाया था। भटकर देश के पहले सुपर कंप्यूटर के आर्किटेक्ट रहे हैं और आरएसएस से जुडे़ संगठन विजनाना भारती के अध्यक्ष हैं। यह संगठन स्वेदशी साइंस मूवमेंट में शामिल है।

मंत्रालय ने 28 सदस्यों वाली परिषद के रिक्त पद के लिए तीन नाम सुझाए थे। इस पर नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है क्योंकि यूनिवर्सिटी के विजिटर स्वयं राष्ट्रपति हैं। मंत्रालय ने इस मामले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

 

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