कानपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 57 लाख की ठगी, पांच गिरफ्तार

कानपुर , साइबर क्राइम थाना, कानपुर नगर ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को पुलिस एवं अन्य सरकारी अधिकारी बताकर एक दंपति को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाया और 57 लाख रुपये की ठगी कर ली थी।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने पत्रकारों को बताया कि भैरव प्रसाद पाण्डेय निवासी रामबाग ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 से 18 अप्रैल के बीच अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें और उनकी पत्नी मीना पाण्डेय को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 57 लाख रुपये की ठगी की।
अभियुक्तों ने व्हाट्सएप कॉल कर स्वयं को पुलिस अधिकारी बताते हुए झूठी सूचना दी कि उनकी पत्नी के आधार कार्ड से पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य आरोपी के खाते में 70 लाख रुपये भेजे गए हैं। इसी आधार पर उन्हें और उनके परिवार को गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। बाद में वीडियो कॉल के माध्यम से वर्दीधारी व्यक्तियों को दिखाकर विश्वास पैदा किया गया और “जांच प्रक्रिया” के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से कुल 57 लाख रुपये जमा करा लिए गए।
गिरफ्तार अभियुक्तों में जय प्रकाश, शुभंकर सिंह, विक्रम सिंह, राजू ठाकुर समेत कुल पांच लोग शामिल हैं। इनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज, फर्जी दस्तावेज, एक अर्टिगा कार तथा अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि अभियुक्त आम नागरिकों को फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर डराते थे और “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे। वे फर्जी लेटरहेड और दस्तावेज भेजकर यह विश्वास दिलाते थे कि पैसा आरबीआई में सुरक्षित जमा है।
साइबर क्राइम थाना, कानपुर नगर ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल या वीडियो कॉल पर विश्वास न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। ऐसी किसी भी घटना की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।





