बीजेपी के फर्जी नामें के खिलाफ अखिलेश यादव की दलितो, पिछड़ों,अकलियतो से अपील

लखनऊ, आज चर्चा हैं एक ऐसे मुद्दे पर जो लोकतंत्र की नींव को हिला रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज एक महत्वपूर्ण संदेश , सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर दिया है, जिसमें उन्होंने भाजपा की साजिश और चुनाव आयोग की निष्क्रियता को बेनकाब किया है।

इस पोस्ट का शीर्षक है: ‘भाजपा का फ़र्ज़ीनामा और चुनाव आयोग की बंद कबूतरी आँख’।
यह पोस्ट PDA – यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों – के वोटर्स के नाम फर्जी तरीके से कटवाने की साजिश पर अखिलेश यादव ने की है। यह सिर्फ एक राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के अधिकारों की लड़ाई है।” SIR (Special Intensive Revision) के बाद फॉर्म 7 के आवेदनों में अचानक उछाल आया है ।

फॉर्म-7 क्या है? यह चुनाव आयोग का फॉर्म है जो मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होता है। लेकिन यहां इसका दुरुपयोग हो रहा है। भाजपा के लोग फर्जी तरीके से PDA वोटर्स के नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 पर फर्जी नाम लिखकर और हस्ताक्षर कर उसे जमा कर रहे हैं, ताकि चुनाव में बिछड़े दलित और अल्पसंख्यकों का वोट न पड़े।
यह संयोग नहीं, साजिश लगती है।”

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा है कि- फर्जी फॉर्म-7 में जितने भी नाम दिख रहे हैं, वो सब PDA समुदायों से हैं – पिछड़े हैं, दलित है और अल्पसंख्यक-मुस्लिम है।

यह साजिश कितनी गहरी है?

सोशल मीडिया पोस्ट में नाम कटवाने के षड्यंत्र की एक लंबी सूची दी गई है।
सुनिए: कहीं कुर्मी, कहीं पटेल; कहीं पाल, कहीं मौर्य; कहीं लोध, कहीं लोधी; कहीं कुर्मी, कहीं यादव; कहीं पासी, कहीं पासवान; कहीं निषाद, कहीं मल्लाह; कहीं केवट, कहीं कश्यप; कहीं कुम्हार, कहीं प्रजापति; कहीं सोनकर, कहीं कोरी; कहीं अंसारी, कहीं भारती; कहीं पटेल, कहीं कनौजिया; कहीं बिंद, कहीं सैंथवार; कहीं भर, कहीं राजभर; कहीं कुंजरा, कहीं रयीन; कहीं गुर्जर, कहीं गडेरिया; कहीं गद्दी, कहीं घोसी; कहीं माली, कहीं सैनी; कहीं मणिहार, कहीं काचर; कहीं हज्जाम, कहीं सलमानी; कहीं तेली, कहीं समानी; कहीं रोगंगर, कहीं धोबी; कहीं लाखेर, कहीं गंगवार; कहीं बाथम, कहीं जाट; और कहीं कोई अन्य PDA…
ये सूची और भी लंबी हो सकती है, अगर चुनाव आयोग AI से निकलवाकर वो सूची दे दे, जो भाजपा ने उनको वोट काटने के लिए दी है या कहें भाजपा से उन्हें मिली है।

अखिलेश यादव के अनुसार, अगर चुनाव आयोग AI का इस्तेमाल करके वो सूची निकाले जो भाजपा ने उन्हें दी है, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। यह वोट काटने की साजिश है, जो PDA समुदायों को टारगेट कर रही है। जिनके नाम काटने की कोशिश हो रही है,

#अखिलेश यादव आगे लिखते हैं की- सुनवाई के लिए 1-2 किमी के अंदर सुनवाई केंद्र बनाए जाएं और सुनवाई में अनसुनी न की जाए।

यानि अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव इसके लिए चुनाव आयोग को सुझाव भी दे रहे हैं वह आगे कह रहे हैं- पीड़ित वोटरो की सुनवाई के लिए 1-2 किमी के अंदर सुनवाई केंद्र बनाए जाएं और पीड़ितों को ठीक से सुना जाए – यह मांग है।

#अखिलेश यादव आगे लिखते हैं की-पंचायत चुनाव को आरक्षण के नाम पर फँसाकर भाजपा सरकार इसलिए टाल रही है कि क्योंकि वो जानती है कि गाँव-गाँव तक जनता उनके विरुद्ध वोट डालने के लिए तैयार बैठी है और भाजपा हज़ार घपले-घोटाले के बावजूद भी जीतने की स्थिति में नहीं है। ये सरकार न जनगणना कर रही है, न जाति गिन रही है। भाजपा पूरी तरह नाकाम सरकार है।
जिनके नाम काटने की कोशिश हो रही हैं, सबकी कहानी एक ही जगह जाकर जुड़ती है : जाति से।

अखिलेश यादव के अनुसार, आरक्षण, जाति जनगणना और वोटर लिस्ट से नाम काटने , ये तीनों बाते एक साथ जुड़ी है । यह तीनों बातें एक ही चीज से जुड़ी है और वह है जाती दलित और पिछड़ों की जाती  न्हीं जातियों के खिलाफ भाजपा है क्योंकि उसे मालूम है कि इन जातियों का वोट उसे नहीं मिलना है। यह सिर्फ नाम काटना नहीं, लोकतंत्र पर हमला है। भाजपा जानती है कि PDA वोटर्स उनके खिलाफ हैं, इसलिए यह चाल चल रही है।”

अखिलेश यादव ने आरक्षण और जाति जनगणना की जो बात की है वह दलित पिछड़ों के हित से जुड़ी हुई है और भाजपा नहीं चाहती है कि दलित पिछड़ों का हित का कोई काम हो।इसलिए पंचायत चुनाव को आरक्षण के नाम पर फंसाकर टाला जा रहा है। क्यों? क्योंकि भाजपा जानती है कि वह लाख तिकड़म के बावजूद, चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं। और जाति जनगणना से पूरी पोल खुल जाएगी कि अभी तक दलित पिछड़ों को क्या मिला? इसलिए जाति जनगणना में देरी हो रही है। अखिलेश यादव की इस बात से यह साफ संकेत है की SIR के फर्जी फॉर्म 7 के क माध्यम से केवल पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक लोगों को ही निशाना बनाया जा रहा है। पिछड़े, दलित जातियों के वोट काटने के लिए यह काम किया जा रहा है। इसका मतलब है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा डर पिछड़े दलित और अल्पसंख्यक से है उसे स्पष्ट मालूम है कि यह तीनों बीजेपी को वोट नहीं देंगे।

#अखिलेश यादव आगे लिखते हैं कि-
जिन्होंने कटवाए – वो कौन हैं? वो सब भाजपा के वर्चस्ववादी, सामंतवादी, प्रभुत्ववादी लोग हैं या उनके संगी-साथी, जिनकी पीठ पर प्रशासन का हाथ है, और हाथ में चुनाव आयोग की ढाल है।
* उन्हें पता है कि वो फ़र्ज़ी फ़ॉर्म-7 भरेंगे, और चुनाव आयोग, प्रशासन कुछ नहीं करेगा।

अखिलेश यादव के अनुसार दलित, पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यकों का वोट कटवाने वाले बीजेपी के ही लोग हैं। बीजेपी के ये सभी लोग वर्चस्ववादी, सामंतवादी और प्रभुत्वादी हैं। और इन पर चुनाव आयोग का हाथ है इसीलिए इनका कोई डर नहीं है। इन्हें अच्छे से मालूम है कि ना तो प्रशासन और ना ही चुनाव आयोग उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा।
और यह जमीन पर दिखाई भी दे रहा है कि
तमाम शिकायतों के बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।

“अब बात चुनाव आयोग की। अखिलेश जी इसे ‘बंद कबूतरी आँख’ कहते हैं – यानी आंखें बंद करके बैठे हैं।
‘फर्जी आवेदनों में 2.5 गुना बढ़ोतरी!’]
नैरेटर: “यह आंकड़े CEO UP के बुलेटिन से हैं – साफ प्रमाण है कि SIR के बाद अज्ञात याचिकाओं से नाम हटाने के आवेदन बढ़ गए। यह संयोग नहीं हो सकता।”
उन्हें पता है कि फर्जी फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं, लेकिन जिसे इसको रोकने की जिम्मेदारी है वह चुनाव आयोग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

इसके आगे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष लिखते हैं कि-
पर समाजवादी पार्टी अपनी लड़ाई लड़ेगी – जिला प्रशासन के पास भी जाएगी, और सुप्रीम कोर्ट तक भी।
* PDA वाले क़यामत तक लड़ेंगे अपने PDA के वोट के अधिकार की लड़ाई क्योंकि वोट छिना तो सब छिन जाएगा।
पीडीए प्रहरी सावधान रहें और वोट कटनेवाले हर पीड़ित की सहायता करें। निगरानी बढ़ा दें, और अपना नारा याद रखें :
एक भी वोट न कटने पाए!
एक भी वोट न घटने पाए!

अखिलेश यादव के अनुसार, इतनी सब साजिश के बावजूद समाजवादी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। क्योंकि, यह लड़ाई सिर्फ वोट की नहीं, न्याय की है। SP ने हमेशा PDA के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। PDA के वोट के अधिकार की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ेगी और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। क्योंकि वोट सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। वोट की महत्ता को बताते हुए ही उन्होंने लिखा है कि वोट छिना तो सब छिन जाएगा।
इसके लिए उन्होंने समाजवादी पार्टी के पीडीएफ प्रहरियो से आवाहन किया है। उन्हें सावधान रहने, निगरानी बढ़ाने और हर पीड़ित व्यक्ति की सहायता के लिए कहा है। हर PDA सदस्य को जागरूक बनाएं – अपना वोटर ID चेक करें, फॉर्म-7 के खिलाफ अपील करें।”
साथ ही उन्होंने SIR से निपटने की अपील करते हुए नारा दिया है।
एक भी वोट न कटने पाए!
एक भी वोट न घटने पाए!
नैरेटर: “दोस्तों, अखिलेश यादव का यह सोशल मीडिया पोस्ट खासकर PDA समाज के लिए एक चेतावनी है कि – लोकतंत्र खतरे में है।
भाजपा का फ़र्ज़ीनामा और चुनाव आयोग की निष्क्रियता PDA समुदायों को निशाना बना रही है।
” उनका कहना है कि, यह साजिश PDA को कमजोर करने की है, लेकिन हम मजबूत हैं।”
हम लड़ेंगे, और जीतेंगे।
एक भी वोट न कटने पाए! एक भी वोट न घटने पाए!

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