छत्रपति शिवाजी सुशासन, जनकल्याण, राष्ट्र गौरव और सांस्कृतिक स्वाभिमान के प्रतीक: पंकज चौधरी

लखनऊ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा ही नहीं थे, बल्कि सुशासन, जनकल्याण, राष्ट्र गौरव और सांस्कृतिक स्वाभिमान के प्रतीक थे।

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शुक्रवार को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री चौधरी ने कहा कि शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए एक सशक्त और जनोन्मुख शासन की स्थापना की, जो आज भी प्रेरणास्रोत है। शिवाजी महाराज का जीवन केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक है। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी दूरदर्शिता, रणनीति और जनविश्वास के बल पर स्थापित ‘हिंदवी स्वराज’ आत्मनिर्भरता और सशक्त नेतृत्व का अनुपम उदाहरण है।

उन्होने कहा कि 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी के पहाड़ी किले में जन्मे शिवाजी महाराज ने कम आयु में ही विदेशी आक्रमणकारियों को परास्त करने का संकल्प लिया। उन्होंने गुरिल्ला युद्धनीति और अनुशासित सेना के माध्यम से विशाल मुगल सेना का सामना किया। उनकी सेना में सभी धर्मों के लोगों को सम्मानजनक स्थान मिला। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के कल्याण और स्वदेशी को बढ़ावा दिया तथा सुदृढ़ किलेबंदी और भारत की पहली नौसेना का निर्माण किया, जिसके कारण उन्हें भारतीय नौसेना का जनक भी कहा जाता है।

उन्होंने शिवाजी महाराज के विश्वस्त सेनानायकों तानाजी मालुसरे, बाजी प्रभु देशपांडे और नेताजी पालकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी निष्ठा और बहादुरी ने मराठा साम्राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिवाजी महाराज द्वारा महिलाओं के सम्मान की नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शत्रु पक्ष की महिलाओं के साथ भी सम्मानजनक व्यवहार किया जाता था, जो उनके उच्च आदर्शों का प्रमाण है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि शिवाजी महाराज ने युवाओं की क्षमता को पहचानकर उन्हें स्वराज के उद्देश्य से जोड़ा। मावल क्षेत्र के युवाओं में ‘हिंदवी स्वराज’ की भावना जागृत कर उन्होंने स्वशासन की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाया। उनका शासन प्रजा के प्रति जवाबदेही, पारदर्शिता और अनुशासन पर आधारित था, जो आज भी सुशासन के लिए प्रासंगिक है।

समारोह में वक्ताओं ने शिवाजी महाराज के जीवन, आदर्शों और राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को स्मरण करते हुए युवाओं से उनके सिद्धांतों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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