काशी में खत्म होगा कूड़े का पहाड़, 25 एकड़ जमीन पर लहलहाएगा मियावाकी जंगल

वाराणसी, काशी में करसड़ा स्थित कूड़े के विशालकाय पहाड़ से जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। नगर निगम ने वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण की कवायद तेज कर दी है। इसके बाद खाली होने वाली 25 एकड़ भूमि पर मियावाकी तकनीक से सघन जंगल विकसित किया जाएगा, जो पर्यावरण को नई संजीवनी देगा।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि निगम ने करसड़ा में जमा लाखों मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए बायोमाइनिंग का रास्ता चुना है। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए जीआईजेड और आरपीयूईएस कंपनियों की मदद ली जा रही है। जापानी तकनीक का उपयोग करते हुए इन कंपनियों ने पूरे डंपिंग ग्राउंड की मैपिंग और कचरे की मात्रा का सटीक आकलन कर लिया है। निगम की ओर से बायोमाइनिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है, जिससे निस्तारण कार्य जल्द ही धरातल पर उतरेगा।
करसड़ा में पिछले एक दशक से जमा लगभग 12.64 लाख मीट्रिक टन कचरे के कारण आसपास के क्षेत्रों में भयंकर दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। हालांकि, कचरे की विशाल मात्रा को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है।
शहर में प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। इस कचरे के निपटान के लिए निगम के पास वर्तमान में करसड़ा में 600 मीट्रिक टन क्षमता का ‘वेस्ट टू कंपोस्ट’ प्लांट और रमना में 600 मीट्रिक टन क्षमता का ‘वेस्ट टू चारकोल’ प्लांट मौजूद है। इसके अलावा रमना में ही मलबे से ईंट और टाइल्स बनाने के लिए सीएंडडी प्लांट भी कार्यरत है।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि करसड़ा का कूड़ा पहाड़ समाप्त होने के बाद वहां विकसित होने वाला 25 एकड़ का मियावाकी वन शहर के ‘ग्रीन लंग्स’ (फेफड़ों) के रूप में काम करेगा। “करसड़ा के कूड़े के पहाड़ का निस्तारण हमारी प्राथमिकता है। बायोमाइनिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कूड़ा साफ होने के बाद वहां 25 एकड़ में मियावाकी वन विकसित किया जाएगा, जो वाराणसी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।”





