जानिए क्यों मुलायम सिंह दर्शन सिंह यादव के थे इतने कायल….

इटावा, उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के छोटे से गांव सैफई को मायानगरी मुबंई के समान अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने में समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव के लंगोटिया यार ग्राम प्रधान दर्शन सिंह यादव का खास योगदान रहा है।

सैफई को वीवीआईपी ग्रामपंचायत बनाने वाले दर्शन सिंह कम पढ़े लिखे होने के बावजूद सरकारी बाबुओं पर कड़ी नजर रखते थे और गांव के विकास के लिए आए पैसे का हिसाब उनसे लेते थे। मुलायम देश-प्रदेश के किसी भी इंसान से ज्यादा भरोसा दर्शन सिंह पर करते थे और जब भी परेशान होते हैं तो उनसे सलाह लेने के लिए खुद गांव पहुंच जाते। दोनों एक कमरे के अंदर कई-कई घंटे गप्पे मारते रहते। मुलायम अपने मित्र की ईमानदारी के इतने कायल है कि उन्हें आजीवन सैफई की सत्ता सौंप दी। दर्शन सिंह 1971 से यहां से निर्विरोध प्रधान चुनते आते रहे हैं वैसे यह भी चर्चा थी कि मुलायम सिंह यादव ने कह दिया था जब तक दर्शन सिंह है तब तक कोई दूसरा प्रधान नही होगा ।

मुलायम सिंह को यादवलैंड में एक ही व्यक्ति है जो सीधे नाम लेकर पुकारता है और गलती करने पर उन्हें फटकार लगाता है। वह और कोई नहीं बल्कि सैफई ग्राम पंचायत के प्रधान व मुलायम के लंगोटिया दर्शन सिंह थे । दर्शन सिंह ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान ग्राम पंचायत सदस्यों के नाम की मुहर लगा मुलायम सिंह के पास भिजवाते और उनकी रजामंदी के वह सभी लोग भी निर्विरोध निर्वाचित होते हैं।

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में इसे एक रिकाॅर्ड के तौर पर देखा जा रहा है। दर्शन सिंह अपने मित्र के सियासी सफर को रफ्तार देने के लिए गांव में बैठकर रणनीति बनाते रहते थे। पार्टी और परिवार के लोगो की माने तो मुलायम, शिवपाल, रामगोपाल और अखिलेश के साथ ही पूरा परिवार दर्शन सिंह को बहुत अधिक सम्मान दिया करता था ।

दर्शन सिंह और सपा सरंक्षक मुलायम सिंह बचपन के दास्त हैं। मुलायम सिंह ने जब राजनीति में कदम रखा तो उनके कंधे से कंधा मिलाकर दर्शन सिंह चले। लोहिया आंदोलन के दौरान 15 साल की उम्र में मुलायम सिंह सियासत में कूद पड़े। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया और फर्रूखाबाद जेल में बंद कर दिया। इसकी भनक जैसे ही दर्शन को हुई तो उन्होंने जेल के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गए। जिसके चलते जिला प्रशासन को मुलायम सिंह को रिहा करना पड़ा।

मुलायम चुनाव लड़ने के लिए पैसे इकट्ठा करने में लगे हुए थे, लेकिन इंतजाम हो नहीं हो पा रहा था। एक दिन नेताजी के घर की छत पर पूरे गांववालों की बैठक हुई, जिसमें सभी जाति के लोगों ने भाग लिया। गांव के ही सोने लाल शाक्य ने बैठक में सबके सामने कहा कि मुलायम सिंह यादव हमारे हैं। उनको चुनाव लड़ाने के लिए हम गांव वाले एक शाम खाना नहीं खाए। एक शाम खाना नहीं खाने से कोई मर नहीं जायेगा, पर एक दिन खाना छोड़ने से आठ दिनों तक मुलायम की गाड़ी चल जाएगी। जिस पर सभी गांव वालों ने एक जुट हो सोने लाल के प्रस्ताव का समर्थन किया और वहीं हुआ।

मुलायम सिंह यादव की ही तरह दर्शन सिंह को भी बचपन से ही पहलवानी का बड़ा शौक था । दर्शन सिंह यादव की मित्र मंडली मे मुलायम के अलावा हाकिम सिंह और बाबूराम सेठ भी रहे है,मुलायम के अलावा कोई अब इस दुनिया में नहीं हैं। काफी समय पहले तक सैफई की होली मे प्रधान दर्शन सिंह यादव मुलायम सिंह के साथ मिल कर फाग गाते रहे है । दर्शन सिंह यादव के कहने पर ही मुलायम ने सैफई महोत्सव मे फाग गायन का मुकाबला शुरू कराया था ।

साल 1967 के चुनाव में दर्शन सिंह यादव मुलायम सिंह के साथ साइकिल पर चुनाव प्रचार करते थे और घूम-घूमकर चंदा मांगते थे। मुलायम पहली दफा जब चुनाव मैदान मे उतरे उनके लिए प्रचार करने वालो मे दर्शन सिंह यादव भी प्रमुख रहे है। उस समय सब साइकिल से चुनाव प्रचार करते थे । बाद में चंदे के पैसों से एक सेकेंड हैंड कार खरीदी पर सभी लोगों को इस कार को खूब धक्के लगाने पड़ते थे, क्योंकि यह कार बार-बार बंद हो जाया करती थी। सैफई में कोई भी पर्व हो, मुलायम सिंह यादव दर्शन सिंह को अपने बगल में ही बिठाया करते हैं।

दर्शन सिंह यादव साल 1972 से ही सैफई के प्रधान चुने जा रहे हैं। पहले प्रधानी के चुनाव नियमित समय पर नहीं होते थे, इसलिए 1972 के बाद 1982, 1988 और 1995 में जब ग्राम प्रधानों के चुनाव कराए गए, तब दर्शन सिंह यादव ही प्रधान बने। 1995 से पांच वर्ष के नियमित अंतराल पर चुनाव कराए जा रहे हैं। तब से दर्शन सिंह को ही ग्राम प्रधान चुना जाता रहा है।

गांव के लोग कहते है कि नेताजी ने गांव में चैपाल के जरिए लोगों से शपथ पत्र लेकर दर्शन सिंह को सैफई सौंप दी । अमूमन साइकिल से सैफई मे घूमते रहने वाले दर्शन सिंह आखिर समय तक भी साधारण लोगों की तरह रहते हैं और शाम को चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते। दर्शन सिंह पर कभी एक भी अरोप नहीं लगा। हर समाज और वर्ग की मदद के लिए वो 24 घंटे खड़े रहते थे ।

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