महिला आरक्षण में एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए कोटा सुनिश्चित किया जाये : मायावती

लखनऊ, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में 33 प्रतिशत आरक्षण में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा प्रावधान नहीं किया गया, तो इस कदम का वास्तविक उद्देश्य काफी हद तक निष्प्रभावी हो जाएगा।

माायावती ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण के मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इस 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने की पहल ”उचित और स्वागतयोग्य” है, भले ही इसमें देरी हुई हो।

पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था में लगातार हाशिये पर रही एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण का प्रावधान किया जाना ऐतिहासिक और न्यायसंगत कदम होगा। उन्होंने कहा कि केवल सामान्य महिला आरक्षण से इन वर्गों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाएगी।

यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में महिला आरक्षण लागू करने को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम , 2023 में संशोधनों पर 16 अप्रैल को चर्चा प्रस्तावित है, साथ ही परिसीमन से जुड़े बिल पर भी विचार किया जाएगा।

सरकार 2029 के आम चुनाव से लोक सभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधन लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित योजना के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए इसे जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण विधेयक को लागू कराने के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के लागू होने से महिलाओं को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों के अनुरूप भागीदारी देना समय की मांग है। बसपा प्रमुख ने केंद्र सरकार से अपील की कि इस विधेयक को लागू करने में किसी प्रकार की

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