अजय राय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ढकोसला बताया

लखनऊ, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ढकोसला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।
अजय राय ने यहां आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम को ढकोसला बताया।
उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी को सम्मान नहीं दे सका, वह देश की महिलाओं को क्या सम्मान देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के आरक्षण की बात केवल दिखावा है और सरकार की मंशा महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने की नहीं है।
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिलाओं को शीर्ष पदों पर सम्मान दिया है। उन्होंने सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी, इंदिरा गांधी, प्रतिभा पाटिल और मीरा कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने कथनी और करनी में समानता दिखाई है।
उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर कहा कि यह पहल सबसे पहले कांग्रेस ने की थी और राज्यसभा में पारित भी कराया था। उनका आरोप था कि अगर भाजपा ईमानदार होती, तो 2014 में ही इसे लागू कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
अजय राय ने हाल ही में नोएडा में हुई घटना और पुलिस लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को अयोग्य बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बर्बरता की गई और पीड़ितों को ही गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर सरकार की आउटसोर्सिंग नीति को कठघरे में खड़ा किया। अजय राय ने कहा कि कांग्रेस शासन में स्थायी नौकरियां मिलती थीं, लेकिन अब ठेकेदारी व्यवस्था में मजदूरों का शोषण हो रहा है।
उन्होंने दावा किया कि काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि न्यूनतम वेतन 25,000 किया जाए और कार्य अवधि आठ घंटे तय की जाए। उन्होंने शिक्षकों से जुड़े मुद्दे पर भी सरकार की नीति की आलोचना की। कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के फैसले का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि 25-30 वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों पर यह नियम लागू करना अन्याय है।
अजय राय ने दावा किया कि इससे लगभग 1.75 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन शिक्षकों के साथ खड़ी है और सत्ता में आने पर हटाए गए शिक्षकों को पुनः बहाल किया जाएगा।





