पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने की राजीव गांधी की पहल परिवर्तनकारी थी : कांग्रेस

नयी दिल्ली,  कांग्रेस ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में की गई पहल ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी थी, जिसका आज देश के दो लाख 67 हजार से अधिक गांवों और जिला परिषदों को फायदा मिल रहा है।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने आज यहां एक बयान में कहा कि 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन 1993 में संविधान का 73वां संशोधन लागू किया गया था, जिसके तहत अनुच्छेद 243-ए- से 243-O तक के प्रावधान जोड़कर पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा और व्यापक अधिकार दिए गए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतें, 6,700 से अधिक मध्यवर्ती पंचायतें और 673 जिला परिषद कार्यरत हैं, जो स्थानीय शासन की मजबूत नींव हैं। कांग्रेस के अनुसार, इस व्यवस्था को मजबूत करने में राजीव गांधी की दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता का अहम योगदान रहा।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की पहल भी राजीव गांधी के प्रयासों का परिणाम थी, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को भी शामिल किया गया। आज देश में लगभग 32 लाख निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि हैं, जिनमें करीब 15 लाख महिलाएं हैं।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण का प्रावधान अनुच्छेद 243-डी(6) के तहत किया गया, जिसका कई राज्यों ने लाभ उठाया है।

पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी सरकार ने 2004 में पंचायती राज मंत्रालय की स्थापना की और 2006 में मनरेगा योजना शुरू की, जिससे ग्राम पंचायतों को विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका मिली।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में मनरेगा को समाप्त कर दिया। पार्टी ने कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं के सशक्तिकरण की ज़रूरत केवल लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की राजनीति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

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