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मथुरा जवाहरबाग हिंसा में हुए शहीदों के परिजन अभी भी न्याय व सम्मान के इंतजार में

मथुरा, उत्तर प्रदेश में मथुरा के जवाहरबाग में पांच साल पहले हुई हिंसा में शहीद दो पुलिस अधिकारियों के परिजन आज भी न्याय और सम्मान के लिए सरकारी अधिकारियों से कर रहे हैं गुहार।

दो जून 2016 को मथुरा शहर में जवाहर बाग पर जबरन कब्जा करने वाले उपद्रवियों और पुलिस के बीच हुए सशस्त्र संघर्ष में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (सिटी) मुकुल द्विवेदी और फरह के थाना प्रभारी संतोष यादव शहीद हो गये थे। इस घटना में जवाहर बाग पर कब्जा करने वाले रामवृक्ष यादव समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।

जवाहर बाग हिंस में शहीद हुए श्री द्विवेदी की धर्मपत्नी अर्चना द्विवेदी वर्तमान में नाेयडा विकास प्राधिकरण में ओएसडी के पद पर तैनात हैं।
अर्चना द्विवेदी आज अपने परिजनों तथा स्पेशल डीजीसी अलका उपमन्यु और अन्य स्थानीय लोगों के साथ जवाहर बाग के एक कोने में बनी शहीद मुकुल द्विवेदी नवगृह वाटिका पर गईं और शहीद के छाया चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उन्होंने सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे न किये जाने पर दुःख प्रकट करते हुए कहा कि घटना के पांच साल बीत जाने के बावजूद जवाहर बाग का नाम शहीद मुकुल द्विवेदी रखे जाने का आश्वासन न तो पूरा किया गया न उनकी प्रतिमा लगाई गई । यही नहीं सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी ने कहा था कि तीन माह में घटना की जांच का परिणाम आ जाएगा लेकिन आज तक उसमें भी कुछ नहीं हुआ। उनका कहना था कि वे अधिकारियों से एक बार पुनः मिलकर न्याय और सम्मान शीघ्र दिलाने का अनुरोध करेंगी।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह कार्य नहीं कर सकती तो उन्हें शहीद मुकुल द्विवेदी के शहीद स्थल पर जमीन दिला दे तो वे अपने पैसे से स्मारक बनवा देंगी। इस अवसर पर मौजूद स्पेशल डीजीसी अलका उपमन्यु ने कहा कि शहीद मुकुल द्विवेदी एवं संतोष यादव की शहादत को देशवासी विशेषकर मथुरावासी भुला न सकेंगे।

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के मुखिया रामवृ़क्ष यादव ने अवैध रूप से जवाहरबाग पर कब्जा कर लिया था। आरोप है कि तत्कालीन एक मंत्री की शह पर उन्हें हटाया नहीं जा सका था लेकिन दो जून 2016 को जब रैकी करने गए तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को घेरकर उपद्रवियों ने उन्हें मार दिया था। घटना स्थल के कुछ दूर पर खड़े पुलिस बल को बाद में पता चला कि जब श्री द्विवेदी की हत्या हो चुकी थी।

इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी राजेश कुमार ने कठोर निर्णय लेते हुए पुलिस को रामवृक्ष के गुर्गो से जवाहर बाग खाली कराने का आदेश दिया था। दोनों ओर से हुई गोलीबारी में फरह के थानाध्यक्ष संतोष यादव भी शहीद हो गये थे। इस घटना में कुल 29 लोग मारे गए थे । घटना की जांच सीबीआई को दे दी गई थी। लगभग 15 करोड़ खर्च करके जवाहर बाग को आज एक पर्यटन स्थल के रूप में भले विकसित कर दिया गया हो पर नीव के उन पत्थरों का फिलहाल भुला दिया गया है जिनकी शहादत की बदौलत करोड़ों कीमत की जवाहर बाग की सरकारी जमीन को मुक्त कर सरकार को वापस दिला दिया था।