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विश्वकप 2005 का कलंक धोना चाहेंगी मिताली

 

नई दिल्ली, भारतीय महिला क्रिकेट टीम 12 साल बाद आईसीसी महिला विश्व कप में अपना दूसरा फाइनल खेलेगी और कप्तान मिताली राज को पता है कि यह उनके और झुलन गोस्वामी के लिए एक विशेष अवसर होगा। वर्ष 2005 में भारतीय टीम विश्वकप के फाइनल में पहुंची थी और उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हारकर बाहर होना पड़ा था। खास बात यह है कि उस समय भी टीम की कमान मिताली के ही हाथों में थी और अब इस बार मिताली उस हार की कलंक को धोना चाहेंगी।

भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में इस बार ऑस्ट्रेलिया को 36 रन से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया और 2005 का बदला भी ले लिया। अब भारतीय टीम के सामने मेजबान इंग्लैंड की कठीन चुनौती है। दूसरी ओर, मिताली राज का भारतीय कप्तान के रूप में आखिरी आईसीसी विश्वकप होगा और वह इंग्लैंड को उसी की धरती पर हराकर अपने तीसरे टूर्नामेंट में भी सफलता हासिल करना चाहेंगी। मिताली ने कहा कि मेरे लिए और झूलन गोस्वामी के लिए बहुत ही खास है क्योंकि हम दोनों 2005 में भारतीय टीम में शामिल थे और हमारे लिए यह 2005 में वापस जाने जैसा लगता है।

उन्होंने कहा कि हम सभी विश्वकप फाइनल का हिस्सा बनने के बाद काफी उत्साहित हैं। हमें पता था कि टूर्नामेंट आसान नहीं होगा, लेकिन लड़कियों ने जब टीम की जरूरत थी तभी अपना बेहतर दिया। मुझे बहुत खुशी है कि लड़कियों ने हमें विश्वकप फाइनल का हिस्सा बनने का मौका दिया है।